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February, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मानवता शर्मसार है? अग्रिपथ...अग्रिपथ..अग्निपथ!

फिर वही कहानी...! शवों व असहाय को कंधे पर लादना कोई शौक नहीं और न ही दिखावा है, यह सिर्फ हमारी व्यवस्था द्वारा दी गई चोट है, जिसे भी लोग अपने साथ लाद रहे हैं. हमारी अंधी- बहरी व्यवस्था ने कुछ ऐसा बना दिया है कि प्राय: हर महीने कोई असहाय किसी न किसी को अपने कंाधों पर लादने मजबूर है.इसमें चाहे उस व्यवस्था से जुड़ा हुआ खाखी पहनने वाला पुलिस वाला ही क्यों न हो वह भी इस कमजोर व्यवस्था के आगे झुकने मजबूर है. समाज में रौब का दूसरा रूप माने जाने वाले ऐसे व्यक्ति भी एक अस्पताल में स्ट्रेचर न मिलने के कारण अपनी बूढ़ी मां को कंधे पर बिठालकर चलने विवश हुआ. पुरानो में श्रवण कुमार एक ऐसा पात्र था जिसने अपने माता पिता को चारों धाम के दर्शन कराने के लिये अपने कंाधों पर लेकर घूमता रहा लेकि न आज एक अन्य श्रवण कुमार भी छत्तीसगढ़ के परलकोट में मिला जो हमारी घिसटती व्यवस्था के परिपे्रक्ष्य में -परेशान नजर आया जिसे अपने पिता की संदिग्ध परिस्थितियों मे मौत के बाद उनके शव को पोस्ट मार्टम के लिये अपनी बाइक के पीछे गठरी बांधकर ले जाना पड़ा. अच्छी स्वास्थ्य सेवा, एम्बुलेंस, स्वच्छता, सफाई और अस्पतालों के अच…

सब कुछ नकली, दवा तो हमें मारने के लिये ही बन रही!

नकली दवाओं के कारोबार में भी हम दुनिया में तीसरा सबसे बड़े देश के रूप में शामिल हो गये हैं-इस संकेत ने मानव जीवन को ही खतरे में डाल दिया है.खाने पीने की हर वस्तु हो या रोजमर्रे के उपयोग में आने वाली वस्तुएं अथवा इंसान का जीवन बचाने के लिये उपयोग में आनी वाली दवाएं सभी का उपयोग अब धीरे धीरे हमारे जीवन के लिये खतरा बनता जा रहा है.हाल ही कुछ ऐसे वीडियों वायरल हुए है जो यह दर्शाते हैं कि देश में भारी संख्या में नकली खाद्य सामग्रियां बनाई जा रही  है तथा उसकी खपत भी हो तेजी से हो रही है. एक वीडियों में नकली चावल तथा नकली फल तक तैयार करने की विधि बताई गई है.प्लास्टिक को गलाकरहू बहु चावल की प्रक्रिया जहां इंसान की जिंदगी से खिलवाड़ है वहीं बंद गोभी तक को  प्लस्टिक से तैयार कर बाजार में उतारना लोगों की कमाई का जरिया हो गया  है.दिल्ली के एक  परिवार ने ऐसे ही एक बंद गोभी से छिलका निकालकर यह साबित कर दिया है कि वह गाोभी जो दिखने में हूबहू असली है लेकिन प्लास्टिक की बनी हुई है.खाने पीने की वस्तुओं को एक तरफ रख अगर दवाओं के बारे में बात करें तो प्राय: जीवनरक्षक दवाओं का नकली मार्केट शुरू हो गया है…