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प्राकृतिक आपदाओं से किसानों, आम जनता को बचाने 67 साल तक सरकारें क्या करती रहीं?

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प्राकृतिक आपदाओं से किसानों,
आम जनता को बचाने 67
साल तक सरकारें क्या करती रहीं?

हम जब से दुनियादारी समझने लगे, तब से लेकर अब तक स्वतंत्र भारत में कई बार सूखा पड़ा, ओलावृष्टि हुई, तूफान आया, बाढ़ से तबाही मची. विदेशों से गेहूं चावल आयात करना पड़ा. आम जनता के घर उजड़े, भारी तबाही मची, लोगों को घर जमीन सब छोड़कर भागना पड़ा. किसानों की खड़ी फसल बर्बाद हुई. खेत खलिहान ऐसे बन गये कि उपजाऊ लायक नहीं रह गई फिर भी देश के किसानों ने चू-चपड़ तक नहीं की. प्रकृति और ईश्वर का कोप मानकर उसने इसे गले लगाया लेकिन समय बीतता गया. यह सब देखते-देखते एक के बाद एक पीढ़ी निकल गई, सरकारें आई-गई लेकिन प्रकृति के ताण्डव से इन सरकारों में बैठने वालों की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा. इन सियासतदारों में से भी बहुत से ऐसे होंगे जिनके परिवार को प्रकृति के ताण्डव को झेलना पड़ा होगा लेकिन चूंकि वे सत्ता में हैं इस कारण उनकी समृद्धि की बढ़ोत्तरी  पर कोई असर नहीं पड़ा. नुकसान हुआ तो उन फटे हाल- हल फावड़ा, खुरपी, गैंती लेकर दिन रात हमारे और आपके लिये खाने का प्रबंध करने वाले अन्नदाताओं पर जिनकी ओर न उन लोगों ने देखा और न ही उन पैसे वा…