सोमवार, 17 नवंबर 2014

मौत फैक्ट्री से निकली दवा सिप्रोसिन-500


मौत फैक्ट्री से निकली दवा सिप्रोसिन-500
ने अब तक कितने लोगों को मारा,
क्या इसका रिकार्ड भी कंगाला जायेगा?

छत्तीसगढ़ में नसबंदी मौतों की वजह सिप्रोसिन-500 दवा है तो इस  सामूहिक हत्याकांड के पहले इस दवा ने और कितने लोगों की जान ली? क्या सरकार यह पता लगायेगी? अब तक नसबंदी  कांड में दवा खाने के बाद कम से कम उन्नीस लोगों की मौत हो चुकी है लेकिन अब सवाल यह उठता है कि दवा तो कई दिनो, महीनों व सालों से बाजार में थी और चिकित्सक इस दवा को सर्दी झुखाम जैसी बीमारियों के लिये लिखते थे तथा कई जोग इसका सेवन भी करते थे इस दवा को खाने के बाद कई लोगों की हालत बिगड़ी भी होगी और उनकी मौत भी हुई होगी लेकिन माना यह ही गया कि स्वाभाविक रूप से ही संबन्धित व्यक्ति बीमारी के बाद चल बसा लेकिन ऐसे लोगों की संख्या तो हजारों में रही होगी क्योकि इस दवा की सप्लाई आज से नहीं वर्षो से हो रही थी.सारा  मामला तभी  उजागर हुआ जब सामूहिक रूप  से एक के बाद एक मौत होने का मामला सामने आया? अब सवाल  यह है कि आखिर इस बात का पता कैसे लगाया जायेगा कि सर्दी झुखाम या अन्य किसी  कारणों से सिप्रोसिन दवा खाने के बाद छत्तीसगढ़ और अन्य प्रांतो में कितने लोगो की मौत हुई? ऐसे में  मामले को क्यों नहीं किसी बड़ी जांच एजेंसी के सुपुर्द कर  दिया जाता?यह भी दिलचस्प है कि एक बार दवा पर  प्रतिबंध लगाने के बाद उसे पुन: अच्छी कंपनी का प्रमाण पत्र देकर बाजार में उतरने का मौका दिया गया. संपूर्ण मामला एक माफिया गिरोह ने चलाया और इसको चालू रखने में कतिपय लोगों ने खूब पैसा भी कमाया.कहने का तात्पर्य यह कि संपूर्ण मामला न केवल सामूहिक नरसंहार का है बल्कि ड्रग माफिया गिरोह द्वारा चलाया गया एक एक ऐसा मामला है जिसने एक तरफ कई लोगों को खूब पैसा कमाने का मौका दिया जबकि कई लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़  किया गया. एक सवाल यह भी उठ रहा है कि सालों से बिक रही  सिप्रोसीन-500 दवा को खाकर कितने लोग मरे होंगे.
दवाओं की जांच न होती, तो यह राज़ भी कभी न खुलता. छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य सचिव डॉक्टर आलोक शुक्ला कि माने तो  पेंडारी और गौरेला पेंड्रा के नसबंदी शिविरों में महिलाओं को मेसर्स महावर फ़ार्मा प्राइवेट लिमिटेड की सिप्रोसीन-500 टैबलेट (सिप्रोफ़्लॉक्सेसिन) खाने के बाद उल्टियां शुरू हुई, जो जानलेवा साबित हुई. राज्य सरकार ने आनन-फानन में सिप्रोसीन 500 समेत दर्जन भर दवाओं और चिकित्सा सामग्रियों के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया. सिप्रोसीन बनाने वाली कंपनी के ख़िलाफ़ केस दर्ज कर उसके मालिक को गिरफ़्तार किया गया सिप्रोसीन-500 में ज़हरीला ज़िंक फ़ॉस्फ़ाइट मिला होने की बात सामने आई  है, जिसका इस्तेमाल चूहामार दवा में होता है. हालांकिकेंद्र सरकार की लैब में इसको  परीक्षण के लिये भेजा गया है वहां से रिपोर्ट आने के बाद और खुलासा होगा.अभी तक छत्तीसगढ़ की दवा दुकानों से सिप्रोसीन-500 की लाखो गोलियां ज़ब्त की गई हैं. सरकारी अभियान जारी है,सरकार चीख चीख कर कह रही है  कि कोई ये दवा न खाए.क्या सरकार अब चैती ह?ै.क्या सरकार ने नसबंदी शिविर के बाद ही यह माना कि मौत का कारण सिप्रोसिन दवा है जो महिलाओं को नसंबदी के बाद दी गई?अगर ऐसा है तो अंजोरी सूर्यवंशी, मदनलाल सूर्यवंशी, हरकुंवर बाई निषाद व गौड़ी तखतपुर की 55 वर्षीय महिला कमलाबाई कौशिक की मौत कैसे हुईर् तथा कोटा फिरंगीपारा के युवक अमृत श्रीवास को गंभीर हालत में अपोलों में क्यों भरती कराया गया. हकीकत यह भी  है कि सिप्रोसीन खाने वाले कम से कम छह लोग छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती कराए गए हैं, जिनका नसबंदी से कोई लेना-देना नहीं. दूसरे अस्पतालों में भी दर्जन भर लोग भर्ती हैं. दवा विशेषज्ञों के अनुसार सिपा्रेसिन बहुत सामान्य दवा है जिसे आमतौर पर दवा दुकानदार बेचते  हैं, लेकिन हमने कभी यह देखा ही नहीं कि इसके खाने वाले का क्या हुआ? अगर पता होता तो कभी न बेचते.विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि सिप्रोसिन पांच चरणों में तैयार होता है लेकिन इसमें कभी जिंक फास्फ ाइट नहीं डाला जाता.इस पूरे मामले की कई एंगल से जांच होनी चाहिये.यह स्पष्ट है कि इस दवा में किसी ऐसे मिश्रण का उपयोग हुआ  है जिससे कई लोगो की  मौत हुई है.