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सीबीएस सी कोर्स या बोझ का पिटारा!

सीबीएस सी कोर्स या बोझ का पिटारा! 19 जुलाई 2017 |एंटोनी जोसफ
इस समय सबसे ज्यादा मुसीबत में कोई है तो वह है माता-पिता और किसी भी घर का नन्हा मुन्ना वारिस जो स्कूल प्रबंधन, शिक्षक-शिक्षिकाओं और सरकार के बीच में बुरी तरह फंसा हुआ हैं. सीबीएससी कोर्स एक तरह से शिक्षा न होकर पहाड़ बन गया है, जिसके नीचे दबकर माता-पिता चीख रहे हैं -चिल्ला रहे हैं और बच्चे तड़प रहे हैं. सीबीएससी कोर्स की हकीकत यह है कि उसे न तो बच्चे समझ पा रहे हैं न शिक्षक और न ही कोई ओर! जिनने भी इस पद्धति को बनाया है वे बच्चों के बस्ते में पत्थर की तरह पुस्तकों का ढेर एक तरह से लाद रहे हंै जिसे उठाकर चलने की क्षमता भी उनमे नहीं है, स्कूलों में इतना होमवर्क दे दिया जाता है कि बच्चे घर में न खाना खा पाते हैं न पढ़ पाते हैं न ही खेल कूद की गतिविधियों में भाग ले पाते हैं. वास्तव में देखा जाए तो बच्चों के ऊपर शिक्षा विभाग का या कहे मंत्रालय का या जिसने भी यह कोर्स बनाया है उसका अत्याचार है बल्कि बच्चों के साथ क्रूरता है. एक तरह से सिलेबस इस तरह का तैयार हुआ है कि बच्चे प्रतिदिन कम से कम 10 से 20 किलो तक बोझ स्…

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